जीवन में जोखिम (risk) लेना क्यों आवश्यक है?

     अपने जीवन में सफल होने के लिए, या वर्तमान स्थिति से अपनी स्थिति को बेहतर बनाने के लिए, अपने मन की इच्छा को पूरा करने के लिए हमको कुछ न कुछ जोखिम (risk) लेना पड़ता हैं. यहाँ जोखिम (risk)” शब्द मैं इसलिए प्रयोग कर रहा हूँ क्योंकि कोई भी नया काम आसान नहीं होता है और इसको शुरू करने से पहले या पूरी तरह से सफलता प्राप्त करने से पहले बहुत सारी अनिश्चितताएँ होती हैं. और सभी को नया काम करने के पहले मन में डर होता है असफलता का. तो ये एक प्रकार से जोखिम (risk) ही हुआ क्योंकि सबको सब चीजें विरासत में नहीं मिली होती हैं खुद का जीवन बेहतर बनाने के लिए, एक सफल मुकाम तक पहुंचने के लिए स्वयं को कुछ न कुछ करना पड़ता है.

कभी सफलता, कभी अनुभव

     जोखिम (risk) लेने का ये मतलब नही है की हमेशा आपको सफलता ही मिलेगी। कभी आप सफल होंगे और कभी असफल होंगे लेकिन हमेशा कुछ न कुछ नया आपको सीखने को मिलेगा और ये आपको एक सफल व्यक्तित्व बनने में सहायक होगा और दूसरों के लिए आप एक उदाहरण बन सकते हैं.

जोखिम (risk)

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किसी भी काम की शुरुआत करने मात्र से आप उसमे आधी जीत हासिल कर लेते हैं

     इतना हमेशा ध्यान में रखना चाहिए की जब भी आप जोखिम (risk) लेने के डर से कोई काम करने से पहले हार मान लेते हैं की ये काम नहीं करना है इसमें हार की संभावनाएं ज्यादा हैं तो आप पहले से ही उसमे पूरी तरीके से हार जाते हैं मतलब आप सौ फ़ीसदी हार गए लेकिन यदि आप जोखिम (risk) होते हुए भी उस काम को करने की ठान लेते हैं तो वहां पर आपके हारने या जीतने की संभावनाएं आधी हो जाती हैं क्यों की जब आप लड़ेंगे तभी आप हारेंगे या जीतेंगे जब आप लड़ेंगे ही नहीं तब तो पूरी तरह से आप हारे हुए हैं.

जोखिम लेना जरूरी क्यों है

     और मै तो कहता हूँ जोखिम लेना ही चाहिए क्योंकि अगर आपके पास कुछ भी नहीं है तो कुछ पाने के लिए जोखिम लेना बहुत जरुरी है अगर आप विफल भी हो गए तो आपके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं रहेगा और अगर सफल हो गए तो आपकी और आपके परिवार की जिंदगी बेहतर हो जाएगी। या आप किसी मुकाम तक पहुंचने के बाद जोखिम लेना चाहते हैं तब भी जोखिम लीजिये क्योंकि अगर आप उसमे विफल भी हो गए तो जिस मुकाम तक आज आप पहुचें हैं अपने मेहनत और काबिलियत से, वो आप फिर से प्राप्त कर लेंगे और अगर सफल हो गए तो सफलता के पायदान पर एक कदम आप और आगे बढ़ जायेंगे।

Comfort Zone से बाहर आना

     जोखिम (risk) ना लेने का आशय यहाँ पर ये है की आप अपने सुविधा क्षेत्र से बाहर नहीं आना चाहते. जो आपको मिला है या आसानी से थोड़ा बहुत मिल सकता है आप उसी में संतुष्ट रहना चाहते हैं वो भी इस डर से की कही ये भी न खो जाये।

     सफलता के लिए हमको अपने Comfort Zone से बाहर जाना पड़ता है चाहे वो आपके रोजगार से सम्बंधित हो, या आप एक अच्छे वक्ता हैं लेकिन जनता के सामने आपको बोलने से डर लगता है, या आप को अपने Startup के लिए किसी Business में निवेश करना हो. आप बैठ के सोचेंगे या सिर्फ उससे होने वाले नुकसान से डरेंगे तो हमेशा डरते ही रहेंगे और शायद कभी सफल ना हो पाएं और जहाँ पर है वही रह जाएँ या उससे भी पीछे जाने की संभावनाएं हैं। जीवन के बहुत सारे फायदेमंद अनुभव हमारे जोखिम (risk) लेने के बाद ही हमको मिल सकते हैं.

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अनिश्चितता और असफलता का डर, उससे बाहर आना पड़ेगा

     असल में हम लोगों को जोखिम (risk) लेने के बाद होने वाली असफलता से डर लगता है जैसे की हम किसी जॉब में हैं और सोचें की नए जॉब में जाने से क्या होगा जॉब surety रहेगी की नहीं, नया बॉस कैसा होगा नए आर्गेनाइजेशन की market में क्या वैल्यू है, समय पर तनख्वाह मिलेगी की नहीं या जब हम किसी नए स्टार्टअप में निवेश करते हैं तो सोचते हैं की ऐसा ना हो की हमारी सारी जमापूँजी डूब ना जाये या आप अपनी असफलता से डरते हों और ऐसा सोचें की लोगों के सामने शर्मिंदा ना होना पड़े. ये सब हमारे दिमाग की अनिश्चितताएँ हैं और मेरा ऐसा मानना है की ये सब संभावित हैं एकदम निश्चित नहीं है की आप असफल ही होंगे।

    जोखिम लेना असफल होना ही नहीं है ये आपके सफल होने की पहली प्रक्रिया है. आपको अपने डर से सामना करना है. आपको अपने डर को हरा कर ही आगे बढ़ना है.

जोखिम (risk)

सब एक समान नहीं होते

     कई लोगों के पास जोखिम (risk) लेने का नकारात्मक उदाहरण भी हो सकता है लेकिन ऐसा जरुरी नहीं की उनकी स्थिति और परिस्थिति एकदम आपके जैसी ही हो. कोशिश, समर्पण, काम करने का तरीका, आत्मविश्वास, सोच और बहुत कुछ ऐसा होगा तो आपसे एकदम अलग हो सकता है

     आपके आस पास, समाज में या देशविदेश में ऐसे बहुत से लोग होंगे या आप जिनके बारें में आप जानते होंगे, पढ़ा होगा या सुना होगा कि शुरूआती दिन बहुत संघर्ष वाले बीते हैं लेकिन अपने जीवन में उन्होंने अपने Comfort Zone को त्याग दिया और आज या भूतकाल में एक सफल व्यक्ति बने जो की देशदुनिया के लिए एक मिसाल बने.

    उदाहरण  के तौर पर आप देख लीजिये हम सबके चहेते क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी को. एक समय पर वो भारतीय रेल में टिकट कलेक्टर थे ,अगर वो भी ये सोचते की बस अब सरकारी नौकरी मिल गयी है और क्या चाहिए जैसा की आम तौर पर लोगों की सोच होती है. अगर वो ये सोच लेते की मैं सरकारी नौकरी छोड़ के चला जाऊंगा और Indian Cricket Team में मेरा चयन नहीं हुआ तो क्या होगा, वहां जाने से मुझे मेरी सरकारी नौकरी से हाथ धोना ही पड़ेगा।। अगर इसी डर से वो वही रह जाते तो आज महेंद्र सिंह धोनी को कोई नहीं जानता लेकिन उन्होंने अपने दिल की आवाज सुनी, साहस दिखाया और मन में ये आत्मविश्वास था की मैं इससे बेहतर कर सकता हूँ और उन्होंने जोखिम लिया उसके बाद जो हुआ वो इतिहास बन गया.

जोखिम (risk) का सामना कैसे करें

     जोखिम (risk) को हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि जोखिम (risk) के परिणाम आपको अपने उद्देश्य तक पहुंचने में भटका सकते हैं ऐसी संभावना भी होती है.

     किसी भी जोखिम (risk) का सामना करने के लिए और उसमे सफलता पाने के लिए आपका साहसी होना और दृढ आत्मविश्वास का होना बहुत जरुरी है.

     एक चीज और मैं यहाँ कहना चाहता हूँ की जोखिम (risk) लेकर कोई कदम उठाने से पहले डर सबको लगता है लेकिन हम भावनाओं में ना बह कर या जोश में ना आकर एक Calculative Risk लें तो असफलता की सम्भावना को काफी हद तक टाला जा सकता है. यहाँ पर Calculative Risk का मतलब है की आने वाली स्थिति या समस्या का सहीसही आंकलन, अपनी योग्यता और क्षमता को जानना. जो काम हाथ में लेने जा रहें हैं उसके बारें में आपको कितना ज्ञान हैं, अगर सफल हो गए तो ठीक और अगर विफल होने लगे तो Plan-B क्या होगा,अगर हम इसमें विफल भी हो गए तो हमको आगे क्या करना है? ये हमारे जीवन पर कितना प्रभाव डाल सकता है.

कभी भी दोनों पैरों से पानी की गहराई नहीं नापनी चाहिए...

     दोनों पैरों से गहराई नापने में अगर पानी गहरा हुआ तो डूबने की संभावनाएं ज्यादा हो जाती हैं. कहने का आशय ये है की एक आधार बना के, एक पैर बाहर रख कर ही दूसरे पैर से गहराई नापें ऐसे में आपको गहराई भी पता चल जाएगी और डूबने की संभावनाएं भी ना के बराबर रहेंगी।

   उदाहरण: – आप अपनी पूरी सेविंग को कही निवेश न करें, आधा ही करें या उतना ही करें जितना अगर नुकसान हो जाये तो बर्दास्त कर सकें। अगर आपका पार्टनर Earning है तब ठीक है अगर नहीं है तो पहले उसको कही Settle करें और उसके Settle होने के बाद आप कोई भी नयी जॉब ज्वाइन कर सकते हैं. या आप जॉब में हैं तो पार्टनर/घनिष्ठ को स्टार्टअप में जाने दें या उसको कोई source of earning हो तब आप business स्टार्टअप कर सकते हैं. ऐसे बहुत सारे उदाहरण हो सकते हैं. ऐसे उदाहरण में अगर आप विफल हो गए तो आपके पास और भी options उपलब्ध हैं लेकिन अगर आप सफल हो गए तब आप भी अपना जीवन बेहतर बनाने के साथ साथ समाज के लिए उदाहरण बन जायेंगे.

     कैसा लगा जीवन में जोखिम (risk) के ऊपर मेरा ये ब्लॉग बताईयेगा जरूर, सुझाव का स्वागत है… धन्यवाद्!!!

By Anurag

One thought on “जोखिम (Risk)”
  1. बहुत ही अच्छा लेख है बिना जोखिम उठाये आगे नही बढ़ा जा सकता ना ही कोई स्थान प्राप्त किया जा सकता है इस लिए जीवन में आवश्यक जोखिम उठाते रहना चाहिए। मिली तो सफलता न मिली तो अनुभव।

    धन्यवाद

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