केदारनाथ मंदिर भारतवर्ष के उत्तराखण्ड राज्य में स्थित है. ये रुद्रप्रयाग जिले में आता है. उत्तराखण्ड (जिसका पूर्व नाम उत्तराँचल) पहले उत्तर प्रदेश का ही एक भाग होता था. लेकिन 9 नवंबर 2000 को उत्तराँचल को एक अलग राज्य का दर्जा मिला। सन 2000 से 2006 तक इस राज्य को उत्तराँचल नाम से जानते थे, 2007 में उत्तराँचल को उत्तराखण्ड नाम दे दिया गया. उत्तराखण्ड को देवभूमि भी कहा जाता है.

     केदारनाथ मंदिर हिमालय की गोद में स्थित बारह ज्योतिर्लिंग, चार धाम और पंचकेदार में से एक है. कत्यूरी शैली से बना हुआ ये मंदिर पत्थरों से बना हुआ है, इसमें विराजमान शिवलिंग अति प्राचीन है. केदारनाथ का शिवलिंग स्वयंभू है. मंदिर का निर्माण पांडव वंश के जनमेजय ने कराया था ऐसा माना जाता है. आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका जीर्णोद्धार कराया था.

Kedarnath

     2013 में उत्तराखण्ड में प्राकृतिक आपदा आने से सबसे ज्यादा प्रभावित केदारनाथ ही था आस पास का इलाका सब क्षतिग्रस्त हो गया था लेकिन मंदिर और गुम्बद एकदम उस महासैलाब में सुरक्षित बच गए थे.

     उत्तराखण्ड में केदारनाथ और बद्रीनाथ दो महातीर्थ हैं. बिना केदारनाथ के दर्शन किये बद्रीनाथ के दर्शन को अधूरा माना जाता है.

'अकृत्वा दर्शनम् वैश्वय केदारस्याघनाशिन:, यो गच्छेद् बदरी तस्य यात्रा निष्फलताम् व्रजेत्'

     अर्थात् बिना केदारनाथ भगवान के दर्शन किए यदि कोई बदरीनाथ क्षेत्र की यात्रा करता है तो उसकी यात्रा व्यर्थ हो जाती है।

     केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम की महिमा बहुत महान है और दोनों धामों के दर्शन का अपना महत्त्व है.

केदारनाथ मंदिर का इतिहास वास्तुशिल्प और पूजा

     हिमालय में महातपस्वी नर और नारायण (भगवान विष्णु के अवतार) ऋषियों की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव साक्षात् प्रकट हुए थे और ज्योतिर्लिग के रूप में हमेशा हमेशा वास करने का वरदान दिया था. ये स्थल पर्वतराज हिमालय के केदार नामक श्रृंग पर स्थित है.

     केदारनाथ मंदिर की स्थापना कब हुई इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है लेकिन 1000 सालों से भी ज्यादा तीर्थ का इतिहास रहा है. कुछ मान्यता के अनुसार केदारनाथ मंदिर का निर्माण १२वीं१३वीं शताब्दी में हुआ था. एक मान्यता के अनुसार ८वीं शताब्दी में इसका निर्माण शंकराचार्य द्वारा कराया गया था. जो पांडवो द्वारा बनवाये मंदिर के बगल में है. मंदिर की सीढ़ियों पर कुछ खुदा है जिसको स्पष्ट रूप से जानना मुश्किल है. कुछ एक इतिहासकारों के अनुसार शैव लोग शंकराचार्य के पहले से ही केदारनाथ तीर्थ जाते थे.

     केदारनाथ मंदिर 6 फ़ीट ऊँचे चबूतरे पर बना हुआ है. मुख्य भाग में मंडप और चारो और प्रदक्षिणा पथ है. बाहर नंदी बैल वाहन के रूप में विराजमान हैं. प्रातः काल में शिवपिंड को प्राकृतिक रूप से स्नान करा कर घी का लेपन किया जाता है. उसके बाद धूप दीप जलाकर आरती उतारी जाती है और संध्या काल में भगवान का श्रृंगार किया जाता है. केदारनाथ मंदिर के पुजारी मैसूर के जंगम ब्राह्मण ही होते हैं.

मंदिर मंदाकिनी के घाट पर बना हुआ है. अंदर अँधेरे में दीपक के प्रकाश के सहारे ही शिव भगवान के दर्शन होते हैं.

पंचकेदार

     महाभारत में विजय प्राप्त करने के पश्चात् पाण्डव भ्रातृहत्या के पाप से मुक्ति पाना चाहते थे. इसलिए पांडव भगवान शिव का दर्शन करके आशीर्वाद लेना चाहते थे. लेकिन भगवान शिव इनसे रुष्ट होके दर्शन नहीं देना चाहते थे. पाण्डव, शिव भगवान का पीछा करतेकरते केदार तक आ गए. भगवान शिव इनसे बचने के लिए बैल का रूप धारण कर लिए और बाकि के पशुओं में जाके मिल गए । लेकिन पांडवों को शक हो गया. भीम ने अपना विशालकाय रूप धारण कर लिया और दो पहाड़ों के ऊपर अपना पैर फैला दिया। सभी जानवर तो पैर के नीचे से निकल गए लेकिन शंकर भगवान रुपी बैल नीचे से जाने को तैयार नहीं हुए और भूमि में अंतर्ध्यान होने लगे. अंतर्ध्यान होते बैल के त्रिकोणात्मक पीठ के हिस्से को भीम ने पकड़ लिया। भगवान शिव ने पांडवों की लगन, भक्ति, दर्शन की अभिलाषा और दृढ संकल्प को देखते हुए साक्षात् दर्शन दिया और उनको पाप से मुक्त कर दिया। उसी समय से भगवान शंकर बैल के पीठ की आकृति में केदारनाथ में पूजे जाते हैं. ऐसा माना जाता है की जब शंकर भगवान बैल के रूप में अंतर्ध्यान हो रहे थे तब उनके धड़ से ऊपर का हिस्सा काठमांडू में प्रकट हुआ, अब वहां पशुपति नाथ का प्रसिद्ध मंदिर है. भुजाएँ तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मध्येश्वर में और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुए. इसलिए इन चार स्थानों सहित केदारनाथ को पंचकेदार कहा जाता है. इन सभी जगहों पर शिव के भव्य मंदिर बने हुए हैं.

Panch kedar

केदारनाथ जाने का उचित समय

     केदारनाथ जाने का सबसे सही समय मई से अक्टूबर के मध्य का होता है. ठंडी के मौसम में यहाँ भारी बर्फ़बारी के कारण मंदिर बंद रहता है और भगवान इस समय उखीमठ में रहते हैं. सर्दियों के मौसम में उखीमठ में भगवान का दर्शन किया जा सकता है. हर साल केदारनाथ मंदिर के कपाट खोलने का समय हिंदी पंचांग में मुहूर्त देख कर तय किया जाता है और बंद होने का समय दीपावली के आसपास होता है. पहाड़ी रास्ता होने से बरसात के मौसम में यहाँ का रास्ता थोड़ा खतरे वाला हो जाता है लैंड स्लाइडिंग के कारण सड़क मार्ग बंद हो जाते हैं और तीर्थयात्री फस जाते हैं.

दर्शन का समय

     आम दर्शनार्थियों के लिए प्रातः 6 बजे मंदिर खुलता है. दोपहर में 3 बजे से 5 बजे तक विशेष पूजा होती है. पांच मुख वाले शंकर जी का विधिवत श्रृंगार होकर 7.30 से 8.30 तक नियमित आरती होती है. 8.30 बजे शाम को मंदिर बंद कर दिया जाता है.

केदारनाथ कैसे जाये

वायु मार्ग द्वारा

     निकटतम घरेलू एयरपोर्ट देहरादून में जॉली ग्रांट हवाई अड्डा है, जो केदारनाथ से लगभग 239 किमी दूर है. यहाँ से दिल्ली के लिए रोजाना उड़ाने होती हैं. देहरादून हवाई अड्डे से टैक्सी द्वारा केदारनाथ जाया जा सकता है. सबसे पास का अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली का इंदिरा गाँधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है.

रेल मार्ग द्वारा

    निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है जो लगभग 221 किलोमीटर है. यहाँ से टैक्सी तैयार रहती है सोनप्रयाग या गौरीकुंड के लिए. यहाँ से 207 किलोमीटर टैक्सी का सड़क मार्ग और 14 किलोमीटर की पैदल यात्रा करके केदारनाथ जाया जा सकता है.

सड़क मार्ग द्वारा

     दिल्ली से माना तक का राष्ट्रीय राजमार्ग पूरे साल खुला रहता है. जिसकी दूरी लगभग 540 किलोमीटर है. केदारनाथ दिल्ली और देहरादून से सड़क मार्ग द्वारा भी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है. केदारनाथ की यात्रा में गौरीकुंड वाहन द्वारा यात्रा करने के लिए आखिरी बिंदु है. गौरीकुंड से 14 किलोमीटर की पैदल यात्रा करके केदारनाथ पहुँचा जा सकता है. दिल्ली से गौरीकुंड की दूरी लगभग 450 किलोमीटर के आसपास होगी। दिल्ली से सोनप्रयाग के लिए काफी बस सुविधा भी है. सोनप्रयाग, गौरीकुंड के पास ही है. प्राइवेट टैक्सी और अपने निजी वाहन से भी सड़क मार्ग द्वारा केदारनाथ (गौरीकुंड) जाया जा सकता है. हरिद्वार और ऋषिकेश से भी बस सुविधा अच्छी है गौरीकुंड के लिए. हरिद्वार से गौरीकुंड लगभग 235-240 किलोमीटर की दूरी पर है.

हेलीकॉप्टर सुविधा

     सोनप्रयाग, मैखंडा, जामू-फाटा और बडासू से हेलीकॉप्टर केदारनाथ के लिए सुबह छह बजे से उड़ान भरना शुरू कर देते हैं, इस बार लगभग 8 हेली कंपनिया लगी हैं इस सर्विस में. केदारनाथ के लिए प्रति यात्री किराया निर्धारित किया गया है। जिसमें गुप्त काशी से 3875 रुपये, फाटा से 2360, सिरसी से 2340 रुपये प्रति निर्धारित किया है। ये एक तरफ के यात्रा का किराया है. एक तरफ या दोनों तरफ के यात्रा के लिए हेली सर्विस बुक की जा सकती है, दोनों तरफ के लिए किराया ज्यादा देना पड़ेगा. एक दिन में दर्शन के लिए 90 मिनट का समय दिया जाता है. इसलिए तय समय के अंदर हेलीकॉप्टर में दर्शन करके वापस आना पड़ता है. यात्रियों को हेलीकॉप्टर के लिए 2-3 घंटे का प्रतीक्षा करना पड़ सकता है ये हेलीकॉप्टर की उपलब्धता, मौसम और दूसरे तरफ के यात्रियों के आने पर निर्भर करता है.

Kedarnath

नीचे कुछ links दिए जा रहें हैं जो आपके केदारनाथ धाम यात्रा के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं.

हेलीकॉप्टर सर्विस के लिए- Click Here

e-पास के लिए – Click Here

e-पास आवेदन करने की प्रक्रिया – Click Here

     अगर आप केदारनाथ धाम की यात्रा करना चाहते हैं तो पहले से ही योजना बना लें और आखिरी समय की भागादौड़ी से बचें। सबसे पहले तो अपना पंजीकरण कराये यात्रा का. ये दो तरह से कर सकते हैं या तो ऑनलाइन या फिर काउंटर पर जाकर। ऋषिकेश और हरिद्वार में सार्वजनिक जगहों पर बहुत सारे काउंटर खोल के रखे हैं, वहाँ पर पहचान पत्र दिखा कर यात्रा कार्ड ले सकते हैं. यहाँ पर आपको बताना होगा की आप चारधाम यात्रा पर जा रहे है या दो धाम या केदारनाथ।

Kedarnath

     गुप्तकाशी/सोनप्रयाग/गौरीकुंड से टट्टू या पालकी से भी केदारनाथ यात्रा की जा सकती है. सुबह के समय तो प्रचुर मात्रा में ये मिलते हैं लेकिन जैसे जैसे दिन बढ़ता जाता है वैसे इनके संख्या में कमी होती जाती है. निर्धारित दरों पर इन टट्टुओं और पालकी को बुक करने के लिए सरकारी काउंटर बने हुए हैं. सोनप्रयाग से केदारनाथ तक टट्टू का दर 2500 था और आने का 2000. जाने में लगभग 6 घंटे लगते हैं और आने में लगभग 4 घंटे। पैदल यात्रा में एक सामान्य व्यक्ति को लगभग 7 घंटे लगते हैं गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक. महाप्रलय से पहले ये यात्रा इतनी सुरक्षित नहीं थी, सरकार को इस बात का अंदाजा नहीं था की इस तरह का विनाश हो सकता है इसलिए अब इस यात्रा को बहुत सुरक्षित कर दिया गया है. आपदा से पहले पर्यटकों के लिए कम इंतज़ाम थे लेकिन अब बहुत ठीक है. गौरीकुंड से केदारनाथ तक की ट्रैक में थोड़ी-थोड़ी दूर पर विश्रामकक्ष, चिकित्सा सुविधा, चाय स्टाल, खाने-पीने का सामान और पुलिस स्टेशन हैं. SDRF के जवान गश्त करते रहते हैं तो पर्यटकों की मदद करते हैं कुछ समस्या होने पर. केदारनाथ पहुंचने पर वहां शिविर में रुक सकते हैं रात में जो NIM द्वारा संचालित होता है. आप वहां पर होटल में भी ठहर सकते हैं.

ट्रेक मार्ग गौरीकुंड से केदारनाथ तक

1. Gaurikund → Rambara Bridge → Jungle Chatti → Bheembali → Linchauli → Kedarnath Base Camp → Kedarnath Temple (Total Distance 16 kms)
2. Chaumasi → Kham → Rambara → Kedarnath (Total Distance 18 kms)
3. Trijuginarayan → Kedarnath (Total Distance 15 kms)

मुझे उम्मीद है की ये केदारनाथ धाम यात्रा के ऊपर लेख आपको अच्छा लगा होगा। जल्दी ही मिलते हैं फिर किसी और यात्रा संबंधी लेख लेकर इसी पेज पर... धन्यवाद्

By Anurag

2 thought on “केदारनाथ”
  1. बहुत सुन्दर जानकारी प्रदान करता लेख है भाई जाने की प्रबल इच्छा है बस आपका साथ हो और बाबा का बुलावा हो तो आनन्द आ जाये

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