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It’s all about our Jodhpur trip!!!     

एक बार मुझे अवसर मिला था जोधपुर जाने का अपने कुछ दोस्तों के साथ साल 2018 में. हम लोग बहुत दिनों से प्रोग्राम बना रहे थे की कही चला जाये और Jodhpur प्राथमिकता में था काफी कुछ सुन रखा था मारवाड़ के बारें में, वहां जाकर करीब से देखने का मन था, मारवाड़ की वीर भूमि देखने की उत्सुकता थी लेकिन समयाभाव के कारण कही जाना संभव नहीं हो पा रहा था लेकिन कुछ ऐसा हुआ की दो दिन का अवकाश एक साथ मिल गया तो बस बन गया प्रोग्राम। लगभग एक हफ्ते पहले ही तय हो गया था की जोधपुर जाना है, तैयारियां होने लगी. हम लोगों में काफी उत्साह बना हुआ था. खैर जैसेतैसे सप्ताहांत आया और हम लोग शाम को निकले अपने निवास से वैसे भी मुझे रात में ड्राइव करना पसंद है तो मैं कहीं भी लम्बे सफर पर जाना होता है तो रात को ही निकलता हूँ.

उत्साही लोगों की टोली साथ में थी हम पांच लोग थे सदानंद, सुबर्णा, पप्पू, आकाश और मैं. फुल वॉल्यूम में म्यूजिक के साथ रात में गाड़ी की रफ़्तार एक अलग ही एहसास कराती है. सभी लोग सफर का आनंद ले रहे थे सबके हाथ मे मोबाइल थे हर क्षण को अपने कैमरे में कैद कर रहे थे. रास्ते में रुक कर भी फोटोग्राफी करते थे हम लोग. हम लोगों को लगभग 600 km की दूरी तय करनी थी. हम लोगों को रास्ते में बाबा रामदेवरा की यात्रा भी मिली। यह मेला जैसलमेर के पोकरण में लगता है और देशविदेश से भक्त आते हैं. यह भी एक अलग तरह का अनूठा अनुभव था, भक्त लोग दूरदराज़ से पैदल जा रहे थे. हमने उनसे भी बात की रुक कर, काफी अच्छा अनुभव था. हम बाबा रामदेवरा की यात्रा के बीच से होते हुए धीरेधीरे जोधपुर की तरफ बढ़ रहे थे.

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जोधपुर से पहले ही हमको ये लगने लगा था की हम धीरेधीरे थारकी तरफ बढ़ रहे हैं, रोमांच बढ़ रहा था हम लोगों का. हम हर चीज को देखना चाहते थे कुछ भी छोड़ना नहीं चाहते थे. आखिर बहुत दिनों के इंतेज़ार के बाद ये अवसर आया था. हम Jodhpur पहुंचे, उम्मेद पैलेस से लगभग 3 km की दूरी पर एक होटल लिया। थोड़ा आराम करके तरोताज़ा होने के बाद हम निकले अपने जोधपुर भ्रमण पर. कोशिश ये थी की अपने दो दिन के ट्रिप पर हम पूरा जोधपुर देख ले लेकिन जहाँ जाते थे, वहां से निकलने का मन नहीं करता था,मेहरानगढ़, जसवंत थड़ा, मंडोर गार्डन, उम्मेद पैलेस, क्लॉक टावर और भी बहुत कुछ सब अपने आप में एक से बढ़कर एक थे. सबका अपना अलग पहचान और गौरवशाली इतिहास रहा है.

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हम अपने आपको गौरान्वित महसूस कर रहे थे की हम आज यहाँ पर आये और इनको अपनी आँखों से देख पाए. जो उत्साह और रोमांच आने के पहले था वो यहाँ आने और Jodhpur के इतिहास को देखने के बाद और बढ़ गया. दो दिनों के अपने जोधपुर यात्रा के दौरान मैं जितना जान पाया, Jodhpur के इतिहास को जितना समझ पाया वो मैं आप लोगों के साथ साझा कर रहा हूँ अगर कोई त्रुटि हो गयी हो तो क्षमाप्रार्थी हूँ. उम्मीद है आप लोग इसको जरूर पसंद करेंगे और एक बार Jodhpur जाने का प्रोग्राम अवश्य बनाएंगे।

About Jodhpur...

Jodhpur trip!!!

     भारत अपने आप में संस्कृति और विरासत में अविश्वसनीय रूप से समृद्ध है और राजस्थान के मुकुट में जोधपुर एक आभूषण की तरह है। जोधपुर को सूर्यनगरीके नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहाँ सूर्य भारत के अन्य नगरों के अपेक्षा बहुत ही ज्यादा चमकीला होता है और इसमें गर्माहट भी ज्यादा होती है. जोधपुर को Gateway of Thar (थार का द्वार) भी कहा जाता है क्यों की ये थार रेगिस्तान के एकदम किनारे पर स्थिति है. यह राजस्थान राज्य (भारत) का दूसरा सबसे बड़ा शहर है.

     जोधपुर ऐतिहासिक रूप से मारवाड़ राज्य की राजधानी था, जो अब राजस्थान का हिस्सा है. रियासतों के महलों, शानदार किलों और पुराने मंदिरों के एक जगह पर ही होने के कारण ये भारत के अलावा विदेशों में भी काफी प्रसिद्ध है और यहाँ पर देसी पर्यटकों के साथसाथ विदेशी पर्यटक भी बहुत संख्या में आते हैं. मेहरानगढ़ किले के आसपास के घरों को नीले रंग में रंगा गया है इसलिए जोधपुर को ब्लू सिटी के नाम से भी जाना जाता है. नीला रंग भगवान शिव से जुड़ा हुआ है. जो ब्राह्मण भगवान शिव को मानने वाले थे उन्होंने अपनी श्रेष्ठता जाहिर करने के लिए अपना घर नीला रंग का करा लिया लेकिन बाद में सबको सामान रूप देने के लिए सबको नीला रंग से रंग दिया गया.

     ये शहर वायुमार्ग, सड़कमार्ग और रेलमार्ग द्वारा भारत के विभिन्न स्थानों से जुड़ा हुआ है. नागपंचमी, मारवाड़ त्यौहार, नव सती, गणगौर, वीरपुरी मेला, होली, दिवाली यहाँ के प्रमुख त्यौहार हैं.इस शहर की सदियों पुरानी परम्पराएं और त्यौहार किसी भी आने वाले को मनमोहित कर लेते हैं और जो यहाँ आता है यहाँ का ही हो के रह जाता है. प्रमुख व्यवसाय फर्नीचर उद्योग, हस्तशिल्प, कांच की चूड़ियाँ, कटलरी, कालीन और संगमरमर उद्योग हैं. रोजाना शाम को यहाँ आयोजित होने वाले पारम्परिक लोकगीत संगीत कार्यकर्म यहाँ आने वाले पर्यटक को बहुत आकर्षित करते हैं.

     जोधपुर शहर एक ऐतिहासिक शहर है जिसकी स्थापना 1459 में राठौड़ वंश के राजपूत प्रमुख राव जोधा द्वारा की गयी थी.

     जोधपुर पश्चिमी राजस्थान का एक महत्वपूर्ण स्थान है और पाकिस्तान की सीमा से मात्र 250 किलोमीटर होने के कारण भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और सीमा सुरक्षा बल के लिए एक प्रमुख आधार की भूमिका निभाता है. यह शहर अपने भोजन के लिए प्रसिद्ध है यहाँ के कुछ प्रसिद्ध भोजन प्याज कचोरी, मावा कचोरी, चतुर्भुज गुलाबजामुन, मिर्चीवड़ा, मसाला घेवर, कबुली, बूंदी लाडू, गट्टे की सब्जी, मखनिया लस्सी, गुलाबजामुन की सब्जी, केर सांगरी की सब्जी और बाजरे की रोटी और दाल बाटी चूरमा हैं. और आपको पूरे भारत में जोधपुर स्वीट्सकी दुकानें देखने को मिल जाएँगी। जोधपुर शहर के प्रमुख आकर्षण मेहरानगढ़ किला, उम्मेद भवन पैलेस, जसवंत थड़ा, घण्टा घर, मंडोर गार्डन, कायलाना झील और उद्यान, बालसमंद झील, राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क, रतनदा गणेश मंदिर, तोरजी का झालरा, सरदार समंद झील हैं. अन्य आकर्षण प्राचीन वस्तुएं, पारम्परिक कपडे, एक खास प्रकार के जूते जिनको मोजरीकहते हैं, ये यहाँ की विशेषताएं हैं. फिल्म इंडस्ट्री के लिए भी जोधपुर एक विशेष आकर्षण का केंद्र हैं. यहाँ पर बहुत सारे फिल्मों, टीवी धारावाहिकों और विज्ञापनों की शूटिंग हो चुकी है और लगातार जारी है.

मैं अपने Jodhpur trip के दौरान जहाँ-जहाँ गया वहां के प्रमुख स्थान

मेहरानगढ़ किला:

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सबसे पहले ये जानते हैं की इस किले का नाम मेहरानगढ़ कैसे पड़ा. सूर्य देवता का गढ़ मेहरगढ़ से इसका नाम है। मेहर का अर्थ है सूर्य और गढ़ का अर्थ है किला।सूर्य, राठौड़ वंश के प्रमुख देवता हैं। और राठौर, सूर्य के वंशज है ऐसी मान्यता है. इसलिए स्थानीय भाषा में मेहरगढ़ को मेहरानगढ़ कहा जाता है. अपने शानदार वास्तुकला के साथसाथ अपने इतिहास के कारण जोधपुर में ही नहीं बल्कि पूरे भारत और विदेशों में भी प्रसिद्ध है. ये किला 1459 में राव जोधा द्वारा बनाया गया था और धरती से 125 मीटर की ऊंचाई पर है. इस किले में 7 द्वार हैं.

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मेहरानगढ़ किले में जाने के लिए नीचे शहर से एक घुमावदार सड़क से होके पहुँचा जा सकता है. मेहरानगढ़ किले का संग्रहालय राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध संग्रहालयों में से एक है। इस किले के अंदर बहुत सारे बेहतरीन महल हैं. इस किले से जोधपुर शहर का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है, जो किसी पहाड़ी के तल पर बिछे नीले कालीन जैसा प्रतीत होता है। मेहरानगढ़ किले में स्थित मुख्य महल मोती महल, फूल महल, शीश महल, तख्त विलास और झाँकी महल हैं। किले के अंदर के दो प्रमुख मंदिर दुर्गा देवी और कुलदेवी को समर्पित हैं.

उम्मेद भवन महल:

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उम्मेद भवन पैलेस दुनिया के सबसे बड़े निजी आवासों में से एक है. इसमें 347 कमरे हैं और इसका एक हिस्सा ताज होटल्स द्वारा प्रबंधित किया जाता है, एक हिस्से में म्यूजियम है और एक हिस्सा अभी भी रॉयल फैमिली के लिए है. इसका निर्माण 1928 -1943 में हुआ. इस पैलेस का नाम वर्तमान मालिक गज सिंह के दादा, महाराजा उम्मेद सिंह के नाम पर रखा गया। 26 एकड़ में फैला हुआ ये पैलेस जोधपुर में सबसे ऊँचे स्थान पर है और राजस्थान की विरासत का एक शानदार नमूना है. उम्मेद भवन पैलेस में ही रॉयल लक्ज़री विंटेज कारों का भी संग्रहालय है. 1920 के दशक में बहुत ही भीषण सूखा और अकाल पड़ा था जोधपुर में, उस समय वहां के किसानों को अपनी और अपने परिवार के जीवनयापन के लिए बहुत कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। इस समस्या से निजात पाने के लिए किसानों ने उस समय के महाराजा, उम्मेद सिंह की मदद ली. महाराजा ने किसानो को रोजगार देने के लिए के लिए एक महल बनाने का फैसला लिया और इस महल का कार्य बहुत ही धीमी गति से किया गया की किसानो को रोजगार मिला रहे.

जसवंत थड़ा:

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इसका निर्माण जोधपुर राज्य के महाराजा सरदार सिंह ने 1899 में अपने पिता महाराजा जसवंत सिंह की याद में करवाया था, ये मेहरानगढ़ किले के पास में ही है. शानदार इमारत वास्तुकला की राजपुताना शैली का एक आदर्श उदाहरण है। इसकी त्रुटिहीन डिजाइन और वास्तुकला उत्कृष्ट शिल्प कौशल का प्रतीक है। यह मारवाड़ के शाही राजपूत परिवार के शमशान भूमि के रूप में जाना जाता है. मकबरे को संगमरमर की जटिल नक्काशीदार चादरों से बनाया गया है।

मंडोर किला और बगीचा

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मंडौर का इतिहास 6वीं शताब्दी से शुरू होता है. यह जोधपुर के पहले मारवाड़ की राजधानी थी. यह मुख्य शहर से लगभग 9 किलोमीटर की दूरी पर है और मंडोर गार्डन एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र है. लॉन, रॉयल सेनोटैफ्स, हॉल ऑफ हीरोज, 33 करोड़ देवताओं का मंदिर, गवर्नमेंट म्यूजियम मंडप गार्डन के प्रमुख आकर्षण हैं।

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पर्यटकों के लिए उद्यान बहुत ही आकर्षक हैं और सुखद और शांतिपूर्ण वातावरण के लिए पेड़ों और बगीचों की योजना बहुत ही सुन्दर तरीके से की गयी थी.

इन सब के अलावा और भी बहुत सारे आकर्षण के केंद्र हैं जोधपुर में जहा जाया जा सकता है, जिनका उल्लेख मैं ऊपर कर चुका हूँ.

आशा करता हूँ की आप लोगों को ये लेख पसंद आया होगा।

Thank you!!! Your feedback always required...

5/5
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By Anurag

9 thought on “Jodhpur trip!!!”
  1. आप लोगो का परम सौभाग्य है जो इतना घूमने को पा जाते हो मै तो ख्वाब ही देखता रह जाता हूँ काश मै भी घूम पाता ।

    बहुत ही अच्छी जानकारी दी है घूमने जाने पर बहुत काम आयेगी।
    धन्यवाद

  2. Very nice story
    And good presentation. Wish you all the best for lovely stories more. Love you.keep it up.

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