Category: Poem

May 24, 2020

जितेन्द्र की कलम से….

अपनो की चाहत से बड़ा कोई धोखा न था, साहिल पर डूबने का भरोसा ना था, काटों ने जख्म दिया होता तो कोई सिकवा न होता, फूल भी जख्मी कर देंगे कभी सोचा न था।।

May 17, 2020

हालात…

सभी देश फूले बैठे थे अपने-अपने परमाणु पर, पर सब के हालात दिख गये एक छोटे से विषाणु पर, बद से बदतर हाल हुआ है बनी है सबकी जान पर, कब किसकी क्या बात करूं सब देशों के ईमान पर, रुका देश है रुका विश्व है लाकडाउन की धार पर, त्राहि कर रहे प्रवासी सब क्वारेन्टीन की मार पर, घर वापस आने की विपदा झलक रही है सड़कों […]

May 13, 2020

जिन्दगी

मुश्किलो में बहक जाना आसान होता है हर पहलू जिंदगी का इम्तिहान होता है डरने वाले को यहाँ कुछ नहीं मिलता और लड़ने वाले के कदमों में जहान होता है

May 13, 2020

याद…

दिन ढल चुका है शाम जा रही है यह रात भी देखो हम पर हंसे जा रही है हर वक्त तन्हाई खामोशी सता रही है कहना सिर्फ यही है –“आपकी याद आ रही है”

May 9, 2020

“माँ” कैसी होती है…

“माँ” शब्द वो एहसास है की आप जब भी किसी तकलीफ में हो इस शब्द के एहसास मात्र से ही काफी राहत महसूस होती है.“माँ” बिना किसी शर्त के प्यार करती है. “माँ” की तरह ख्याल सिर्फ और सिर्फ “माँ” ही रख सकती हैं, कोई और करे तो बस वो ख्याल ही होता है.“माँ” संवेदना हैं, भावना है, झुलसते दिनों में शीतलता का एहसास है.“माँ” […]

May 7, 2020

“जितेन्द्र की कलम से…”

1. जब इंतजार के लम्हे पिघलने लगते हैं, हम यूं ही बेपरवाह टहलने लगते हैं, कुछ कशिश जिंदगी की बाकी रह गयी है दिल में , हसरतों के भंवर से खुद ही निकलने लगते हैं।। 2. हालत अब ये कैसे अनजाने हो गये लोग अब लोगों से बेगाने हो गये, स्वास्थ्य और शिक्षा को जरुरी था समझा, इस हालत मे जरुरी मयखाने हो गये।। 3. […]