कल हम लोग 74thवां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहे हैं. लगभग 200 साल के क्रूर ब्रिटिश हुकूमत के बाद हमको आज़ादी मिली थी 15 Aug 1947 को और तब से पूरे भारतवर्ष में ये दिन भारत के कोनेकोने में हर्षोउल्लाष के साथ मनाया जाता है. आज हम जो ये खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं ये हमारे स्वतंत्रता सेनानियों, क्रांतिकारियों का कर्ज है हमारे ऊपर. हजारों की संख्या में हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी.

     महान क्रांतिकारियों द्वारा किये गए आंदोलन, विद्रोह, युद्ध के परिणाम स्वरुप हमको आज़ादी मिली। हमारा सम्पूर्ण भारत गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था लेकिन भारत माता की आज़ादी के लिए भारत माता के सपूत जैसे की नेता जी सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह, सरदार वल्लभ भाई पटेल, जवाहर लाल नेहरू, महात्मा गाँधी, तात्यां टोपे, नाना साहिब, लाल बहादुर शास्त्री, सुखदेव, रानी लक्ष्मी बाई, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, मंगल पांडेय, विनायक दामोदर सावरकर, C राजगोपालाचारी, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्लाह खान (और भी ऐसे बहुत से नाम हैं जिनको मैं यहाँ भूल रहा हूँ उसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ, क्योंकि किसी के भी योगदान को कम नहीं आँका जा सकता है) ने अंग्रेजों की ईट से ईट बजा दी थी और उनको भारत छोड़कर भागने पर मजबूर कर दिया था.

स्वतंत्रता दिवस

आजादी के लिए 15 अगस्त का दिन ही क्यों चुना गया.

स्वतंत्रता दिवस

     1946 में द्वितीय विश्व युद्ध के समाप्त होने के बाद Britain की सरकार ने खस्ताहाल होने के बाद महसूस किया की उसको न तो घर पर जनादेश मिला, न ही कोई अंतर्राष्ट्रीय समर्थन और भारत में बढ़ते विद्रोह को नियंत्रित करने के लिए देशी सेना की विश्वसनीयता भी वो हासिल नहीं कर पा रहा है. फिर 20 फरवरी 1947 को प्रधान मंत्री क्लीमेंट एटली ने घोषणा की कि ब्रिटिश सरकार जून 1948 तक ब्रिटिश भारत को पूर्ण स्वशासन प्रदान करेगी।

     नए वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच बढ़ते विवाद से घबरा कर (उनका ऐसा मानना था की इससे उनकी अंतरिम सरकार गिर सकती है) 15 Aug 1947 का दिन चुना जो की जापान के आत्मसमर्पण की दूसरी वर्षगांठ थी.

     3 June 1947 को ब्रिटिश सरकार ने ये घोषणा कर दी की ब्रिटिश भारत को दो अलगअलग राज्यों में विभाजित करने के विचार को स्वीकार कर लिया है और 15 Aug 1947 को दोनों एक स्वतंत्र देश हो जायेंगे।

पाकिस्तान क्यों अपना स्वतंत्रता दिवस 14 Aug को मनाता है

     Indian Independence Bill 4 July को ब्रिटिश संसद में पेश हुआ था और इसने 15 जुलाई को कानून की शक्ल ली थी. इस बिल के मुताबिक 14-15 की मध्यरात्रि को भारत का बटवारा होना था और 15 Aug को वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन दो जगह दिल्ली और करांची में एक साथ उपस्थित नहीं हो सकते थे इसलिए उन्होंने 14 Aug को ही पाकिस्तान को शक्ति हस्तांतरित कर दी थी. और 15 Aug को दिल्ली आ गए थे. आज़ादी दोनों देशों को एक ही दिन मिली थी लेकिन पाकिस्तान को कागज एक दिन पहले मिल गए थे इसलिए पाकिस्तान ने 14 Aug को ही अपना स्वतंत्रता दिवस मना लिया था.

     14 Aug को पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस मनाने के और भी तर्क है जैसे की उस दिन 27वां रमजान था जो की इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से बहुत पाक दिन माना जाता है. और कुछ इतिहास कर बताते हैं की एक कारण टाइम जोन का अलग होना भी माना जाता है, पाकिस्तान 30 मिनट आगे हैं भारत से तो जब रात के 12 बजे थे तब पाकिस्तान में 11:30 ही हुए थे.

अब जानते हैं कुछ अपने राष्ट्र ध्वज के बारें में

स्वतंत्रता दिवस

     राष्ट्रीय ध्वज की जब से स्थापना हुई तब से आज तक इसमें बहुत सारे परिवर्तन हुए हैं. राष्ट्रीय ध्वज की स्थापना राष्ट्रीय संघर्ष के दौरान हुई थी और अभी तक के इसमें परिवर्तन भारतवर्ष के राजनीतिक विकास को दर्शाते हैं.

राष्ट्रध्वज के रंग

स्वतंत्रता दिवस

     हमारे राष्ट्रीय ध्वज में तीन रंग है भगवा, सफेद और हरा. भगवा रंग देश की ताकत और साहस को दर्शाता है, सफ़ेद रंग शांति और सच्चाई का प्रतीक है और हरा रंग यहाँ की उर्वरता, वृद्धि और शुभता को दर्शाता है.

अशोक चक्र

स्वतंत्रता दिवस

     बीच में अशोक चक्र को स्थान दिया है है राष्ट्र ध्वज में जो की धर्म चक्र का प्रतीक है.इसमें 24 तीलियाँ है जिनका हर एक का अपना अलग महत्व है.

24 तीलियों का अलग-अलग महत्त्व

1. संयम (संयमित जीवन जीने की प्रेरणा देती है)

2. आरोग्य (निरोगी जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है)

3. शांति (देश में शांति व्यवस्था कायम रखने की सलाह)

4. त्याग (देश एवं समाज के लिए त्याग की भावना का विकास)

5. शील (व्यक्तिगत स्वभाव में शीलता की शिक्षा)

6. सेवा (देश एवं समाज की सेवा की शिक्षा)

7. क्षमा (मनुष्य एवं प्राणियों के प्रति क्षमा की भावना)

8. प्रेम (देश एवं समाज के प्रति प्रेम की भावना)

9. मैत्री (समाज में मैत्री की भावना)

10. बन्धुत्व (देश प्रेम एवं बंधुत्व को बढ़ावा देना)

11. संगठन (राष्ट्र की एकता और अखंडता को मजबूत रखना)

12. कल्याण (देश व समाज के लिये कल्याणकारी कार्यों में भाग लेना)

13. समृद्धि (देश एवं समाज की समृद्धि में योगदान देना)

14. उद्योग (देश की औद्योगिक प्रगति में सहायता करना)

15. सुरक्षा (देश की सुरक्षा के लिए सदैव तैयार रहना)

16. नियम (निजी जिंदगी में नियम संयम से बर्ताव करना)

17. समता (समता मूलक समाज की स्थापना करना)

18. अर्थ (धन का सदुपयोग करना)

19. नीति (देश की नीति के प्रति निष्ठा रखना)

20. न्याय (सभी के लिए न्याय की बात करना)

21. सहकार्य (आपस में मिलजुल कार्य करना)

22. कर्तव्य (अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना)

23. अधिकार (अधिकारों का दुरूपयोग न करना)

24. बुद्धिमत्ता (देश की समृधि के लिए स्वयं का बौद्धिक विकास करना)

     26 Jan 2002 को भारतीय ध्वज संहिता को संशोधित किया गया था और स्वतंत्रता के कई वर्षों के बाद, भारत के नागरिकों को अंततः किसी भी दिन अपने घरों, कार्यालयों और कारखानों पर भारतीय ध्वज फहराने की अनुमति दी गई थी. अब किसी भी समय तिरंगे झंडे को फहरा सकता है बस किसी भी तरह का राष्ट्र ध्वज का अपमान नहीं होना चाहिए।

हम आज भी गुलाम है

     आजादी के इस गौरवान्वित अवसर पर यह कहना अच्छा नहीं लग रहा है लेकिन हम आज भी बहुत सी चीजों के गुलाम हैं ये मजबूरी वश कहना पड़ रहा है. हमारे क्रांतिकारियों ने अपने लहू देकर, अपना जीवन देकर हमको ये आज़ादी दिलाई थी. क्या क्या यातनाएं नहीं सही उन्होंने बाल्यावस्था में ही कितनो ने फांसी के फंदे को चूम लिया, अपने परिवार को छोड़ दिया, सामाजिक जीवन छोड़ दिया, आज़ादी के दीवानों ने हँसते-हँसते अपनी जान बलिदान कर दी भारत माता की आज़ादी के लिए. लेकिन आज वर्तमान भारत की स्थिति ऐसी है की कोई की राजनीतिक पार्टी का गुलाम है, किसी को उसके धर्म ने गुलाम बना के रखा है तो कोई गन्दी मानसिकता का गुलाम है. 
     राजनीतिक दल अपने फायदे के लिए एक-दूसरे को धर्म के नाम पर जाति के नाम पर उलझा कर अपना उल्लू सीधा कर रही हैं और हम गुलाम बन कर उनके उलझाए हुए रास्ते पर दौड़ रहे हैं. कुछ धर्म के ठेकेदार, धर्म के नाम पर लड़ा रहे हैं, कुछ घटिया मानसिकता के लोग समाज पर काले धब्बे के सामान है जहाँ आज आज़ादी को प्राप्त हुए 73 साल हो गए वही आज भी बहन-बेटियां अपने को रास्ते पर और घर में भी सुरक्षित नहीं समझती है और समय-समय पर ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं. आये दिन कहीं न कहीं लूट, हत्या, बलात्कार, दंगों को खबरें समाचार की सुर्खियां बनी रहती हैं,  सोच कर खुद से सवाल करिये क्या इसी दिन के लिए हमारे आज़ादी के दीवाने शहीद हुए थे? वो भी चाहते तो अंग्रेजों को गुलामी करके अपना जीवन यापन कर लेते क्या जरुरत थी उनको अपनी जान गवाने की? लेकिन उन्होंने एक स्वस्थ और समृद्ध भारत की कल्पना की थी. उनको गुलामी मंजूर नहीं थी. शहीदों और  क्रांतिकारियों में सभी धर्म-समाज के लोग थे अलग-अलग प्रान्त के लोग थे. उनका सपना एक भारत का था. छोटे-छोटे धर्म-जाति के आधार पर बटें हुए भारत का नहीं था.

हमारे देश की शक्ति एकता और अखंडता ही है.

     तो आईये हम सब मिल कर प्रण लें की किसी भी कीमत पर अपने देश की एकता और अखंडता पर आंच नहीं आने देंगे और अपने पूर्वजों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे। हम आपस में किसी भी मसले पर फूट नहीं पड़ने देंगे जिससे किसी दुश्मन को इसका फायदा मिले। हम सब मिल कर भारत देश को और आगे लेके जायेगे। आज इस कोरोना महामारी के दौरान हमारा देश आर्थिक संकट से भी जूझ रहा है तो हम किसी और मसले में न उलझ कर अपने देश को विकास के रास्ते पर ले जायेंगे, दंगे-फसाद से नुकसान ही होता है उससे बचेंगे और इस मुसीबत से एकजुट होकर बाहर निकलेंगे और भारत को फिर से सोने की चिड़िया बनाएंगे। और तभी स्वतंत्रता दिवस का असली मकसद सार्थक होगा 

खुद के अंदर बदलाव की जरुरत

     हर 15 Aug पर हम टीवी पर प्रधानमंत्री का भाषण सुनते हैं, देशभक्ति गीत गाते हैं और सुनते हैं, गाड़ियों और घरों पर तिरंगा लगा लेते हैं और अपने क्रांतिकारियों के बारें में थोड़ा सोच लेते हैं बस एक दिन, हो गया हमारा स्वतंत्रता दिवस का सेलिब्रेशन और दूसरे दिन से ही सब भुला कर अपने रंग में रंग जाते हैं भूल जाते हैं की आज अपना देश जिस रास्ते पर जा रहा है है उसका जिम्मेदार इस देश का हर एक नागरिक है. अगर हर आदमी अपनी जिम्मेदारी समझ ले तो ये देश बहुत तरक्की कर ले जायेगा। ईर्ष्या, छल-कपट से बचे, एक-दूसरे की सहायता करे, दीन-दुखियों के ऊपर दया करे, किसी निर्बल को न सताए, किसी का हक़ न छीने, आस-पास साफ-सफाई रखे, पेड़-पौधों को लगाए उनको जीवन दें तो ये धरती स्वर्ग बन जाये।

जय हिन्द जय भारत

By Anurag

3 thought on “स्वतंत्रता दिवस”
  1. मैं भारत बरस का हरदम सम्मान करता हूँ,
    यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ,
    मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की,
    तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ।
    जय हिंद जय भारत

  2. बहुत खूब
    अद्भुत ज्ञान प्रदान किया भाई
    जय हिन्द जय भारत

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