सर्द दिसंबर नए साल की खुशबू लेकर आती है
रात ठिठुरती दिवस बीतते सपने नए सजाती है

जो कुछ था अच्छा बुरा पुराना साल बीतने वाला है
उम्मीद किरण नववर्ष नया विश्वास जगाने वाला है
बीते सालों की कसक दर्द अहसास पुरानी लाती है
सर्द दिसंबर नए साल की खुशबू लेकर आती है

दो हजार बीस में सबको कोरोना ने दगा दिया
कितनों की छीनी जिंदगियां कितनों को बेघर बना दिया
देखो उसी कोरोना संग नव वर्ष भी हमें बुलाती है
सर्द दिसंबर नए साल की खुशबू लेकर आती है

भूल पुरानी बात आज में सपने नए सजाने हैं
दो हजार इक्कीस में सबको सारे जख्म बुलाने हैं कसक टीस को छोड़ नया उम्मीद जगाने आती है
सर्द दिसंबर नए साल की खुशबू लेकर आती है

महामारी का दुख, मंदिर का सुख सब को इस साल मिला
आगे सब अच्छा होगा जन-जन को यह विश्वास मिला
नया वर्ष सुखमय जीवन एहसास दिलाने आती है
सर्द दिसंबर नए साल की खुशबू लेकर आती है

जितेंद्र की कलम से

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