कुछ social Media Platform के माध्यम से पता चला की आज friendship day है, लेकिन मैं friendship day पर कुछ नहीं लिखूँगा क्योंकि कोई एक दिन का Celebration दोस्तों या दोस्ती के नाम पर निर्धारित करना अपने दोस्त या दोस्ती के लिए अन्याय होगा। कोई भी Celebration day जैसे की friendship day, Valentines day या और भी बहुत सारे days इनको विदेशों में greetings कंपनियों या Gift कंपनियों द्वारा social networking sites के आने के बाद बढ़ावा दिया गया है, ऐसा मेरा मानना है और काफी हद तक सच्चाई भी है इसमें। विदेशों में छुट्टियों में Celebration के बीच बिज़नेस को कैसे promote किया जाये उसके फलस्वरूप ये बहुत सारे कथित days का जन्म हुआ.

दोस्ती

दोस्ती का रिश्ता

     मनुष्य का जन्म जब होता है तब बहुत सारे रिश्ते उसको पहले से ही मिले होते हैं जैसे मातापिता, भाईबहन, बाबादादी, नानानानी, मामा, मौसी इत्यादि। और कुछ सामाजिक सम्बन्ध कहें या व्यावसायिक सम्बन्ध कहें जो मानव जीवन में ऐसे होते हैं जिसमे आप कुछ नहीं कर सकते बस बन जाते हैं जैसे की आपका बॉस कौन होगा, आपका स्कूल का प्रिंसिपल कौन होगा, आपके साथ आपके ऑफिस में काम करने वाले कौन लोग होंगे या आपके साथ आपके क्लास में कौन स्टूडेंट बैठ कर पढ़ेगा।

     लेकिन दोस्ती एक ऐसा संबंध है ऐसा रिश्ता है जिसको आप अपने पसंद से चुनते हैं, बनाते हैं. हमारी लाइफ में बहुत लोग आते हैं जैसे स्कूल क्लास में लगभग 80-90 students पढ़ते थे, जहाँ हमारा घर था जहाँ बचपन बीता गलीमोहल्लों में बहुत लोगों से संपर्क हुआ लेकिन सबसे दोस्ती नहीं हुई आज लगभग जीवन का आधा पड़ाव पार कर लेने के बाद कुछ ही लोगों से संपर्क बना हुआ है.

दोस्ती का कोई मतलब नहीं होता

     दोस्ती लोगों के बीच आपसी स्नेह का सम्बन्ध होता है. दोस्ती का कोई मतलबनहीं होता क्यों की जहाँ मतलबहोता है वहां दोस्ती नहीं होती। Friendship विचारोँ का, एकदूसरे के देखभाल का, उनके सुख से ज्यादा दुःख में भागी होने का एक पारस्परिक मजबूत रिश्ता होता है और जहाँ खून के रिश्ते नहीं साथ देते वहां दोस्त खड़े होते हैं मुसीबत के दिनों में ये मेरा वास्तविक अनुभव भी है.

     दोस्ती ऐसा नहीं है की आपके हमउम्र से ही हो, आप से बड़े उम्र के लोगों से भी होती है और छोटे लोगों से भी होती है. मेरे हिसाब से बिना दोस्तों के जीवन जीना बड़ा असंभव सा है.

हम हर रिश्ते में दोस्ती का रिश्ता खोजते हैं

     दोस्ती एक ऐसा रिश्ता होता है की सब लोग अपने रिश्ते में दोस्त खोजते हैं, आपने अक्सर लोगों को कहते या social media पर पोस्ट करते हुए देखा होगा “my dad is my best friend”, “my mother is my best friend” “my hubby is my best friend” etc. मतलब बिना दोस्ती के रिश्ते के हर रिश्ता सूना है.

दोस्तों से ताकत और आत्मविश्वास बढ़ता है

     दोस्ती एक ऐसा अनुभव एक ऐसा एहसास है की दोस्तों का नाम ज़ेहन में आते ही एक अलग रोमांच, ताकत और आत्मविश्वास मिलता है जो कहीं से भी नहीं मिलता।

     दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जिसमे जातिधर्म, मज़हब, ऊँचनीच नहीं देखता। दोस्ती give and take policy को follow नहीं करता अगर ऐसा तो तो आप इस भ्रम में हैं की ये आपकी दोस्ती है.

मेरे दोस्त मेरा अभिमान

     आज आजीविका के लिए एक दशक से ज्यादा समय से मैं अपने दोस्तों से दूर हूँ मतलब उनसे मिलना बहुत कम हो पाता है, उनके किसी सुख या दुःख में कम ही शरीक हो पाता हूँ और ये मेरा दुर्भाग्य है ये मैं खुद से महसूस करता हूँ लेकिन मैं भगवान, अल्लाह को शुक्रिया कहना चाहूंगा की मैं इस मामले में थोड़ा सौभाग्यशाली हूँ की मुझे कुछ ऐसे दोस्त दिए हैं तो मेरे ताकत आज भी बने हुए हैं. मैं कहीं भी रहता हूँ लेकिन मेरे दोस्त हमेशा मेरे दिल में रहते हैं और वो ही मुझे ताकत देते हैं. मुझे ये विश्वास है की मैं दुनिया के किसी भी कोने में रहूँगा लेकिन कभी भी जरुरत पड़ने पर मुझे किसी से बोलना भी नहीं पड़ेगा कहीं से भी वो सुनेंगे तो मेरे लिए मेरी ताकत, मेरा बल बन कर खड़े हो जायेंगे। मुझे ये बोलते हुए ये गर्व हो रहा है की मेरे दोस्त मेरा अभिमान“.

हमराज़ और सच्चा दिशा-निर्देशक

     दोस्तों से बात करने के लिए न उनसे appointment लेना पड़ता है न ही सही समय का इंतज़ार। हम बहुत सी बातें अपने माँपिता, बीवी से share नहीं कर पाते उनको दोस्तों से बताते हैं. एक अच्छा दोस्त जीवन पर अपनी अमिट छाप भी छोड़ता है. मैंने अक्सर लोगों को कहते हुए सुना है की उसकी कोई बुरी आदत उसके फलां दोस्त के कारण लग गयी. या उसको smoking करना या शराब पीना उसके दोस्त ने सिखाया। अगर ऐसा कोई कहता है तो वो बिलकुल गलत है और इस विषय पर मुझसे संवाद कर सकता है.

     बचपन से लेकर आज तक मेरे हर प्रकार के दोस्त रहे हैं और आज भी हैं लेकिन मैंने सिर्फ उन्ही चीजों में हाथ डाला जिनको मैं खुद करना चाहता था. मेरे किसी भी दोस्त ने कभी भी मुझको किसी गलत चीज के लिए प्रोत्साहित नहीं किया हमेशा सही राह दिखाई, आगे बढ़ाया, सपोर्ट किया। वैसे दोस्ती में थैंक यूबोलना शायद दोस्ती का अपमान हो लेकिन अपनी भावना व्यक्त करना और आभार व्यक्त करने के लिए मैं बोलना चाहता हूँ, “थैंक यू दोस्तों“.

     आज कल अक्सर लोगों को बोलते हुए सुना है की आज कल कोई दोस्त नहीं होता सब मतलब के यार होतें है वगैरहवगैरह। लेकिन मैं उनसे कहना चाहता हूँ की आपने दोस्तों की आड़ में दीमक से दोस्ती कर ली होगी जो दोस्ती को अंदर ही अंदर खा रहे हैं और दोस्ती जो की एक पवित्र शब्द है और दोस्त भगवान का दिया हुआ एक खूबसूरत तोहफा है उसको बदनाम कर रहे हैं.

लम्बे अंतराल की दोस्ती

    जैसा की मैंने ऊपर लिखा है की मैं पिछले बहुत सालों से अपने home-town से दूर रहता हूँ, अपने मित्रों से रोजाना मिल नहीं पाता लेकिन आज तक मेरे किसी दोस्त ने मुझे इस बात का एहसास नहीं होने दिया और मेरा जिससे भी दोस्ती का रिश्ता था वो दिनदिन गहरा ही होता गया है, जबकि मैं किसी के कुछ काम नहीं आता. लेकिन मेरे दोस्तों ने आज तक मुझे अकेला नहीं छोड़ा। और जब भी काफी लम्बे अंतराल के बाद उनसे मिलना होता है तो वो सच में ये एहसास करा देते हैं की किन अनमोल हीरों को मैं छोड़ के अब जिंदगी जी रहा हूँ.

     रोजाना दिन भर की भागदौड़ भरी जिंदगी के बाद शाम को जब बैठते हैं तब दिल में एक कसक सी उठती है की काश ये पल दोस्त मेरे साथ बैठे होते तो शायद मन कुछ हल्का हो जाता। Corporates की Politics, Competitive Life-Style के बीच, दूसरों को दबा के आगे निकलने की होड़ के बीच दोस्तों की कमी बहुत खलती है आज.

बचपन की दोस्ती

     कभीकभी बचपन की घटना याद आती है की दोस्त हमको parents की डाँट से बचाने के लिए या स्कूल में teachers से पिटाई खाने से बचाने के लिए क्याक्या नौटंकी करते थे, कितने बहाने बनाते थे, कितने झूट बोलते थे याद आता है तो सच में आँखों में आंसू आ जाते हैं and literally I am getting very emotional now while writing this blog on friends.

     बचपन में हम कहीं भी जाते थे तो दोस्त सिर्फ हमारा साथ देने के लिए साथ चल देता था भले ही उसको ना जाना हो. और आज भी जब उनसे मिलना होता है तो सिर्फ हम मिलते हैं अपने बचपन की बातें करते हैं अपने पहले साथ बिताये गए मीठी यादों को ताज़ा करते हैं. हम अपने सफलता या Positionकी बातें कम ही करते हैं लगभग ना के बराबर। हमको आज कितनी salary मिलती है या हम आज किस Post पर कितने बड़े MNC में Job करते हैं इससे ना मेरे दोस्तों को कोई लेना देना है ना है मैं उनको इससे अवगत कराता हूँ लेकिन वो हर जगह मेरा सम्मान बढ़ाते हैं ये मेरे लिए गौरव की बात है

मेरे दोस्त मेरे आदर्श

     मेरे कुछ दोस्त ऐसे भी हैं जिनके nature और behavior ने मेरे जीवन में बहुत प्रभाव डाला है इसलिए मैं अपने कुछ दोस्तों को अपना Ideal भी मानता हूँ और समयसमय पर दूसरे लोगों से उनकी चर्चा भी करता रहता हूँ.

व्यवसाय में दोस्ती कुछ हद तक ठीक है लेकिन दोस्त में व्यवसाय नहीं खोजना चाहिए

     दोस्ती को मापने का कोई पैमाना नहीं होता, दोस्त की जीत में अपनी जीत और दोस्त की हार में अपनी हार होनी चाहिए।कुछ modern लोग व्यावसायिक दोस्ती को प्रगाढ़ दोस्ती की पराकाष्ठा समझते हैं और जब व्यवसाय ख़त्म हो जाता है तब ये दोस्ती भी उसी के साथ ख़त्म हो जाती है फिर ये दोस्ती को मतलब का व्यवसाय बना देते हैं.

     खैर दोस्ती और अपने दोस्तों के ऊपर लेख बहुत बड़ा हो सकता है लेकिन अपने सभी दोस्तों को धन्यवाद् देते हुए अपने इस article को यही विराम देता हूँ.

     और आखिरी में यही कहूंगा की दोस्त है तो जिंदगी है और अगर जिंदगी है तो दोस्तों का होना भी बहुत जरुरी है

चाहे दुःख हो चाहे सुख हो दिल ने तुझको ही पुकारा, तूने हमको है बनाया, तूने हमको है सँवारा, जहाँ को रब का का है, हमें तेरा है सहारा...

First time during writing tears come in my eyes…Love you all!!!

Thanks for being in my life…to all my friends

By Anurag

4 thought on “दोस्ती”
  1. बहुत ही ईमानदार प्रस्तुति अनुराग जी!!
    यूँ ही बने रहिए

  2. On this day I am really greatful to have this blog…jo padhne k bad bahut acha feel ho raha hai…friends are really very important persons In our life..I realised it…remembered my school n college time…
    Thank you Anurag sir..keep sharing your ideas which is really very much beneficial…lots of love to all friends..🎉

  3. मुझसे एक दोस्त नहीं बदला जाता,
    चाहे लाख दूरी होने पर ,
    लोगों के तो भगवान तक बदल जाते हैं
    एक मुराद पूरी ना होने पर l

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