जितेन्द्र की कलम से….

अपनो की चाहत से बड़ा कोई धोखा न था,

साहिल पर डूबने का भरोसा ना था,

काटों ने जख्म दिया होता तो कोई सिकवा न होता,

फूल भी जख्मी कर देंगे कभी सोचा न था।।

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