“जननी”

नारी तुम विश्व रचयिता हो सद्भाव समर्पण तुमसे है,

है सकल विश्व तुमसे पूरित हर मानव जीवन तुमसे है,

सबको तेरे पग चिन्हों पर चल कर आगे बढ़ना होगा,

तुझसे निश्छल परिपाटी का ये प्रेम ग्रंथ पढ़ना होगा।

माँ बहन और अर्धन्गिनी का सब रूप सबल बल तुमसे है,

हो शक्ति स्वरूपा हे जननी अस्तित्व हमारा तुमसे है,

प्रणाम सहस्त्रों बार तुम्हे ईस्वर स्वरूप सब तुमसे है।

उस जगत जननी जगदंबा का प्रत्यक्ष रूप माँ तुमसे है।।।

"जितेन्द्र की कलम से"

By Anurag