गणतंत्र दिवस भारत देश का एक राष्ट्रीय पर्व है जो प्रत्येक साल 26 जनवरी को बहुत ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है. इसी दिन सन् 1950 को भारत सरकार अधिनियम (एक्ट) (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था। एक स्वतन्त्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे एक लोकतान्त्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था। 26 जनवरी को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था।

गणतंत्र दिवस

     आज हम अपना 72वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं. आज 26 जनवरी 2021 को कोरोना महामारी के कारण कोई विदेशी अतिथि तो शामिल नहीं हो पाया गणतंत्र दिवस की परेड में लेकिन पहली बार राफेल विमान और राम मंदिर (उत्तर प्रदेश) की झांकी को देख कर मन प्रफुल्लित हो गया लेकिन आज के ही दिन दिल्ली, जो की हमारी राष्ट्रीय राजधानी भी है उसका दूसरा रूप देख कर मन बहुत द्रवित हो गया, पूरी दिल्ली में आंदोलन, रैली, उत्पात, उपद्रव, दंगे, झड़प, आंसू गैस के गोले, लाठी चार्ज और पथराव ने पूरे भारत को विश्व पटल पर शर्मशार कर दिया। आज एक नया चीज भी देखने को मिला कि आज़ादी के बाद लाल किले पर कोई और झंडा लगाया गया. हमारा तिरंगा हमारी आन-बान-शान और अभिमान है और ऐतिहासिक धरोहर पर तिरंगा ही होना चाहिए न की कोई धार्मिक या राजनैतिक झंडा, ये बहुत ही घृणित कृत्य की श्रेणी में आता है और इसका दंड जरूर दोषियों को मिलना चाहिए। आंदोलन का मतलब ये नहीं होता की हम अपने देश का अपमान करें। आज के दिन पूरे विश्व की निगाहें भारत पर होती हैं कि भारतीय सेना के बेड़े में कौन सा नया सैन्य हथियार शामिल हुआ, और भारत की संस्कृति को जानने की कोशिश की जाती है लेकिन आज पूरा विश्व दिल्ली के दंगे देख रहा है. गलत कौन है? किसके कारण आज ये दृश्य दिखाई दे रहा है दिल्ली में?, जिम्मेदार कौन है? ये बताने के लिए शायद मैं सही व्यक्ति नहीं हूँ लेकिन जो भी हो रहा है गलत हो रहा है.

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गणतंत्र दिवस का इतिहास

     15 अगस्त 1947 को भारत को आज़ादी मिलने के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई और इसने अपना कार्य 9 दिसम्बर 1947 से आरंभ कर दिया। संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे. डॉ० भीमराव अम्बेडकर, जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे. संविधान निर्माण में कुल 22 समितियां थी जिसमें प्रारूप समिति प्रमुख एवं महत्त्वपूर्ण समिति थी और इस समिति का कार्य संपूर्ण ‘संविधान लिखना’ या ‘निर्माण करना’ था। प्रारूप समिति के अध्यक्ष विधिवेत्ता डॉ० भीमराव आंबेडकर थे। प्रारूप समिति ने और उसमें विशेष रूप से डॉ. आंबेडकर जी ने 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन में भारतीय संविधान का निर्माण किया और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 26 नवम्बर 1949 को भारत का संविधान सुपूर्द किया, इसलिए 26 नवंबर दिवस को भारत में संविधान दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता है।

गणतंत्र दिवस

     26 जनवरी 1950 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने 21 तोपों की सलामी के साथ ध्वजारोहण कर भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया। यह ऐतिहासिक क्षणों में गिना जाने वाला समय था। इसके बाद से प्रत्येक वर्ष इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है तथा इस दिन देशभर में राष्ट्रीय अवकाश रहता है।

     अनेक सुधारों और बदलाव के बाद सभा के सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान की दो हस्तलिखित प्रतियों पर हस्ताक्षर किए और इसके दो दिन बाद 26 जनवरी 1950 को ये लागू हो गया. 26 जनवरी 1950 को भारत का अपना शासन और कानून व्यवस्था लागू हुई थी.

     आज़ादी को पाने के लिए न जाने कितने माताओं की गोद सूनी हो गयी थी, ना जाने कितने बहनों को अपना भाई खोना पड़ा था और न जाने कितनी औरतें विधवा हो गयी थी, अनगिनत बलिदान देने के बाद हमारा भारतवर्ष आज़ाद हुआ था और उसके बाद अपना कानून, अपना संविधान लागू हो पाया था. हमारा संविधान दुनिया का सबसे सशक्त संविधान है. अगर भारत का नागरिक सिर्फ अपने संविधान का पालन करे तो हम एक भयमुक्त, अपराध मुक्त एक स्वस्थ समाज की कल्पना कर सकते हैं लेकिन स्थिति बहुत अलग है.

     आज़ाद भारत का जो सपना हमारे पूर्वजों, महापुरुषों, स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था हम उससे कही भटक गए हैं. भारत के संविधान ने भारत को एक मजबूत लोकतंत्र दिया था लेकिन समयसमय पर स्वार्थानुसारलोकतंत्र की हत्या होती रहती है.

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गणतंत्र दिवस समारोह

गणतंत्र दिवस
गणतंत्र दिवस

     गणतंत्र दिवस पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा तिरंगा फहराया जाता है उसके बाद राष्ट्रगान गाया जाता है. उसके बाद राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को सलामी दी जाती है. गणतंत्र दिवस पूरे देश के साथसाथ दिल्ली में बहुत ही भव्य तरीके से मनाया जाता है. हर साल राजपथ पर एक भव्य परेड का आयोजन किया जाता है. इस भव्य परेड में भारतीय सेना के विभिन्न रेजिमेंट, वायुसेना, नौसेना आदि सभी भाग लेते हैं। इस समारोह में भाग लेने के लिए देश के सभी हिस्सों से राष्ट्रीय कैडेट कोर व विभिन्न विद्यालयों से बच्चे आते हैं, समारोह में भाग लेना एक सम्मान की बात होती है। परेड प्रारंभ करते हुए प्रधानमंत्री अमर जवान ज्योति (सैनिकों के लिए एक स्मारक) जो राजपथ के एक छोर पर इंडिया गेट पर स्थित है पर पुष्प माला अर्पित करते हैं| इसके बाद शहीद सैनिकों की स्मृति में दो मिनट मौन रखा जाता है।

     राजपथ पर होने वाले परेड में विभिन्न राज्यों की प्रदर्शनी भी होती हैं, प्रदर्शनी में हर राज्य के लोगों की विशेषता, उनके लोक गीत व कला का दृश्यचित्र प्रस्तुत किया जाता है। हर प्रदर्शनी भारत की विविधता व सांस्कृतिक समृद्धि प्रदर्शित करती है। परेड और जुलूस राष्ट्रीय टेलीविजन पर प्रसारित होता है और देश के हर कोने में करोड़ों दर्शकों के द्वारा देखा जाता है।

भारत का संविधान

     भारत का संविधान, भारत का सर्वोच्च विधान है जो संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर 1949 को पारित हुआ तथा 26 जनवरी 1950 से प्रभावी हुआ। यह दिन (26 नवम्बर) भारत के संविधान दिवस के रूप में घोषित किया गया है जबकि 26 जनवरी का दिन भारत में गणतन्त्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत का संविधान विश्व के किसी भी गणतांत्रिक देश का सबसे लंबा लिखित संविधान है। भारतीय संविधान को पूर्ण रूप से तैयार करने में 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन लगे. द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद जुलाई 1945 में ब्रिटेन ने भारत संबन्धी अपनी नई नीति की घोषणा की तथा भारत की संविधान सभा के निर्माण के लिए एक कैबिनेट मिशन भारत भेजा जिसमें 3 मंत्री थे। इस सविधान में सर्वाधिक प्रभाव भारत शासन अधिनियम 1935 का है। इस में लगभग 250 अनुच्छेद इस अधिनियम से लिये गए हैं। भारत के मूल संविधान में मूलतः आठ अनुसूचियाँ थीं परन्तु वर्तमान में भारतीय संविधान में बारह अनुसूचियाँ हैं। भारतीय संविधान के प्रस्तावना के अनुसार भारत एक सम्प्रभुता संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य है। समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द संविधान के 1976 में हुए 42वें संशोधन द्वारा प्रस्तावना में जोड़े गए। इससे पहले धर्मनिरपेक्ष के स्थान पर पंथनिरपेक्ष शब्द था। यह अपने सभी नागरिकों को जाति, रंग, नस्ल, लिंग, धर्म या भाषा के आधार पर कोई भेदभाव किए बिना सभी को बराबरी का दर्जा और अवसर देता है।

गणतंत्र दिवस

     हमारा संविधान देश के नागरिकों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी सरकार चुनने का अधिकार देता है। संविधान लागू होने के बाद डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने वर्तमान संसद भवन के दरबार हॉल में राष्ट्रपति की शपथ ली थी और इसके बाद पांच मील लंबे परेड समारोह के बाद इरविन स्टेडियम में उन्होंने राष्‍ट्रीय ध्‍वज फहराया था।

     यह भारतीय संविधान का सर्वाधिक महत्वपूर्ण लक्षण है, राज्य की शक्तियां केंद्रीय तथा राज्य सरकारों में विभाजित होती हैं। दोनों सत्ताएँ एकदूसरे के अधीन नहीं होती है, वे संविधान से उत्पन्न तथा नियंत्रित होती हैं।

गणतंत्र दिवस

     भारतीय संविधान का संशोधन भारत के संविधान में परिवर्तन करने की प्रक्रिया है। एक संशोधन के प्रस्ताव की शुरुआत संसद में होती है जहाँ इसे एक बिल के रूप में पेश किया जाता है। भारतीय संविधान में अब तक 124 बार संशोधन किया जा चुका है।

संविधान में प्रशासन या सरकार के अधिकार, उसके कर्तव्य और नागरिकों के अधिकार को विस्तार से बताया गया है.

तीन प्रमुख बिंदु

     भारत का संविधान तीन प्रमुख बिंदुओं पर आधारित है। पहला राजनीतिक सिद्धांत, जिसके अनुसार भारत एक लोकतांत्रिक देश होगा। यह सार्वभौमिक, धर्मनिरपेक्ष राज्य होगा।

    दूसरा भारत की सरकारी संस्थाओं के मध्य किस प्रकार का संबंध होगा? वे एक दूसरे के साथ किस प्रकार कार्य करेंगे? सरकारी संस्थाओं के क्या अधिकार होंगे? क्या कर्तव्य होंगे? और किस प्रकार की प्रक्रिया संस्थाओं पर लागू होगी?

    तीसरा, भारतीय नागरिकों को कौन कौन से मौलिक अधिकार प्राप्त होंगे तथा नागरिकों के क्या कर्तव्य होंगे? इसके अलावा राज्य के नीति निर्देशक तत्व क्या होंगे?

    डॉ भीम राव अम्बेडकर की अध्यक्षता में भारत के संविधान का निर्माण हुआ और भारत के संविधान की शक्ति भारत की जनता है, इसकी शुरुआत भी हम भारत के लोगसे प्रारम्भ होती है.

     आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर हम सबको ये प्रण लेना चाहिए कि हम अपने संविधान का पूर्णतया पालन करेंगे और एक सशक्त, समृद्ध,स्वस्थ, सुन्दर भारत का निर्माण करने में सहयोग प्रदान करेंगे।

जय हिन्द।।। जय भारत।।।वन्दे मातरम।।।

By Anurag

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